इतिहास के गुमनाम सिपाही…जिसकी तस्वीर कभी छपी नहीं, वही आंदोलन की पहली आवाज
आंदोलन खत्म हो गया, नेताजी याद रह गए—पत्रकार फिर अगले संघर्ष में निकल पड़े! इतिहास की एक अजीब आदत है। वह हमेशा विजेताओं के नाम याद रखता है, लेकिन विजय की नींव रखने वालों को अक्सर भूल जाता है। वह मंच पर खड़े नेताओं की तस्वीरें छापता है, नारों को याद रखता है, भाषणों को…
