ग्लोबल संकट के राहत भरी खबर: देश में नहीं होगी तेल, गैस और खाद की किल्लत, पैनिक न करें देशवासी

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में लगातार बदलते भू-राजनीतिक हालात और ग्लोबल सप्लाई चेन पर मंडराते खतरों के बीच केंद्र सरकार ने देशवासियों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने एक हाई-लेवल अंतर-मंत्रालयी बैठक के बाद साफ किया है कि देश में एलपीजी, पेट्रोल, डीजल और खाद जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई पूरी तरह नियंत्रण में है। सरकार ने नागरिकों से किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने और पैनिक न होने की अपील की है।

बैठक में खाद की उपलब्धता की समीक्षा की गई, जहां सरकार ने बताया कि आगामी खरीफ 2026 सीजन के लिए कुल अनुमानित मांग करीब 383.9 लाख मीट्रिक टन है। इसके मुकाबले देश में अभी से ही 197.56 लाख मीट्रिक टन का बंपर स्टॉक मौजूद है, जो कुल जरूरत का 50 फीसदी से अधिक है। अब तक 147.40 लाख मीट्रिक टन खाद देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाई जा चुकी है।

आम जनता और रसोई के बजट को लेकर भी राहत भरी खबर है। सरकार के मुताबिक, देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और हाल ही में रिकॉर्ड 1.77 करोड़ एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी की गई है। इसके अलावा, शहरों में एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क को युद्धस्तर पर फैलाया जा रहा है, जिसके तहत 9.24 लाख से अधिक नए उपभोक्ता इस आधुनिक और सुरक्षित सिस्टम से जुड़ चुके हैं।

भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार ने E85 जैसे सस्ते वैकल्पिक ईंधन को प्रमोट करने की बात कही है। साथ ही, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), हाइड्रोजन और बायो-फ्यूल जैसी तकनीकों पर मिशन मोड में काम चल रहा है ताकि देश को प्रदूषण मुक्त और आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

खरीफ सीजन के लिए बंपर स्टॉक तैयार
अनुमानित मांग: 383.9 लाख मीट्रिक टन (खरीफ 2026)
वर्तमान स्टॉक: 197.56 लाख मीट्रिक टन (जरूरत का 50%+ हिस्सा सुरक्षित)
घरेलू कदम: उत्पादन और आयात में बढ़ोतरी, कंपनियों को निर्बाध सब्सिडी का सपोर्ट।

रिकॉर्ड तोड़ एलपीजी डिलीवरी
सिलेंडर डिलीवरी: हाल के दिनों में रिकॉर्ड 1.77 करोड़ एलपीजी सिलेंडरों की सफल आपूर्ति।
सरकार की अपील: ईंधन या गैस की जमाखोरी न करें, देश में सप्लाई पूरी तरह सामान्य है।

रसोई में दोगुनी हुई PNG की रफ्तार
नए कनेक्शन: हाल ही में 9.16 लाख नए पीएनजी कनेक्शन बांटे गए।
नेटवर्क विस्तार: 3.05 लाख नए कनेक्शनों के लिए अंडरग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार।
बड़ा लक्ष्य: शहरों में पारंपरिक सिलेंडरों पर निर्भरता घटाना और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देना।

 

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