UP में कृषि यंत्रों पर सब्सिडी की नई व्यवस्था, YOGI सरकार ने बिचौलियों और फर्जीवाड़े पर कसा शिकंजा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के अन्नदाताओं को आधुनिक खेती से जोड़ने और कृषि क्षेत्र में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार ने एक ऐतिहासिक पहल की है। सरकार ने किसानों को कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी की व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और असरदार बनाने के लिए एक नई ऑनलाइन प्रक्रिया को अमलीजामा पहना दिया है।

इस नई व्यवस्था के तहत कृषि यंत्र निर्माता कंपनियों का ऑनलाइन पंजीकरण और इम्पैनलमेंट शुरू कर दिया गया है। सरकार की इस कोशिश का सीधा मकसद छोटे से छोटे किसानों तक उत्तम गुणवत्ता वाले आधुनिक उपकरण पहुँचाना है, जिससे खेती की लागत कम होगी और फसलों का उत्पादन बढ़ने से किसानों की आमदनी में भारी इजाफा होगा।

ऑनलाइन प्रक्रिया से बिचौलियों का खेल खत्म
कृषि विभाग ने अब सभी कंपनियों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। सरकार द्वारा तय कड़े मानकों को पूरा करने वाली कंपनियां ही सब्सिडी पर उपकरण मुहैया करा पाएंगी। ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने से कंपनियों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और योजना का सीधा लाभ बिना किसी हेराफेरी के बेहद तेज रफ्तार से वास्तविक किसानों तक पहुंचेगा। इसके साथ ही, अब सभी कंपनियों को अपने उपकरणों की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) सार्वजनिक करनी होगी, जिससे डीलर किसानों से मनमानी कीमतें नहीं वसूल पाएंगे।

ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी
कृषि विभाग ने कंपनियों के लिए पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है। कड़े मानकों को पूरा करने वाली प्रमाणित कंपनियां ही अब सरकारी योजनाओं के अंतर्गत किसानों को भारी छूट पर मशीनें दे सकेंगी।

घटिया मशीनों के खेल पर रोक, सीरियल नंबर से होगी पहचान
तय सीमा से ज्यादा सब्सिडी वाले कृषि यंत्रों पर कंपनियों को एक स्थायी और स्पष्ट सीरियल नंबर अंकित करना होगा। इससे नकली और घटिया क्वालिटी के उपकरणों की बिक्री पर पूरी तरह लगाम लगेगी।

कीमतों की हेराफेरी का अंत, दुकानों पर दिखेगी सही कीमत
पंजीकृत कंपनियों को अपनी वेबसाइट और डीलरों के शोरूम पर कृषि यंत्रों की एमआरपी (MRP) बड़े अक्षरों में प्रदर्शित करनी होगी। इससे किसानों से होने वाली अवैध वसूली और धोखाधड़ी बंद होगी।

लागत में कमी, मुनाफे में वृद्धि, तकनीकी बदलाव का शंखनाद
आधुनिक और प्रमाणित मशीनों के इस्तेमाल से खेतों में लगने वाली भारी मजदूरी और समय की बचत होगी। बिचौलियों का खेल खत्म होने से शत-प्रतिशत लाभ सीधे जरूरतमंद किसानों को मिलेगा।

 

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