मृत्यु पंचक का साया समाप्त: शुरू हुए सभी शुभ कार्य, जानें क्यों खतरनाक था यह समय

मुरादाबाद: मुरादाबाद और देश भर के सनातन धर्मावलंबियों के लिए आज राहत की खबर है। पिछले पांच दिनों से चले आ रहे अशुभ ‘मृत्यु पंचक’ का साया आज यानी 11 जून को पूरी तरह समाप्त हो गया है। आचार्य एसपी शास्त्री ने बताया कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार, आज गुरुवार की सुबह 08 बजकर 16 मिनट पर पंचक काल खत्म हो चुका है। इसके साथ ही पिछले कई दिनों से रुके हुए सभी मांगलिक और शुभ कार्यों पर लगी रोक हट गई है, और लोग अब नए काम की शुरुआत बिना किसी हिचकिचाहट के कर सकते हैं।

क्यों बेहद खतरनाक माना जाता है ‘मृत्यु पंचक’?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में गोचर करता है, तो उस अवधि को पंचक कहा जाता है। यह पंचक 6 जून, शनिवार की शाम 07:03 बजे शुरू हुआ था।

पंचक का विशेष गणित
शनिवार के दिन से शुरू होने वाले पंचक को ‘मृत्यु पंचक’ कहा जाता है। ज्योतिषविदों के अनुसार, यह पंचक बेहद कष्टकारी और अशुभ माना जाता है। इन पांच दिनों के दौरान किसी भी तरह के जोखिम भरे कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है, क्योंकि इस दौरान दुर्घटना, चोट और विवाद की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

अब कर सकते हैं ये 5 वर्जित कार्य
पंचक समाप्त होते ही उन पांच प्रमुख कार्यों को करने की अनुमति मिल गई है, जो पिछले पांच दिनों से पूरी तरह वर्जित थे:
घर का निर्माण: नए मकान का लेंटर डालना या छत बनाना अब शुरू किया जा सकता है।
चारपाई/बेड लाना: पंचक में लकड़ी का बेड या चारपाई बनाना और खरीदना अशुभ माना जाता था, जो अब मान्य है।
लकड़ी और ईंधन: घर में लकड़ी, कंडा या घास एकत्र करने पर लगी रोक हट गई है।

दक्षिण दिशा की यात्रा: पंचक के दौरान दक्षिण दिशा (यम की दिशा) की यात्रा वर्जित थी, अब आप यात्रा कर सकते हैं।
आज सुबह 08:16 बजे के बाद से गृह प्रवेश, मुंडन, नए व्यापार की शुरुआत और भूमि पूजन जैसे सभी शुभ कार्यों के लिए मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।

 

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