वाशिंगटन:अमेरिका में विदेशी पेशेवरों और आईटी कंपनियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। बोस्टन की एक संघीय अदालत ने पूर्ववर्ती ट्रंप प्रशासन की एक विवादित नीति को पूरी तरह से अवैध करार दे दिया है। अदालत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को करारा झटका देते हुए H-1B वीज़ा पर लगाए गए $1,00,000 (एक लाख डॉलर) के भारी-भरकम शुल्क को रद्द करने का ऐतिहासिक आदेश पारित किया है।
कोर्ट ने नीति को बताया ‘अवैध’
संघीय अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि वीज़ा शुल्कों में इतनी अत्यधिक बढ़ोतरी करने का फैसला तार्किक नहीं था और यह तय प्रशासनिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन करता है। अदालत के इस फैसले से न केवल उन हजारों विदेशी पेशेवरों को राहत मिली है जो अमेरिका में काम करने का सपना देख रहे हैं, बल्कि उन अमेरिकी टेक कंपनियों ने भी राहत की सांस ली है जो कुशल प्रतिभाओं के लिए H-1B वीज़ा पर निर्भर रहती हैं।
भारतीय आईटी पेशेवरों को मिलेगी बड़ी राहत
H-1B वीज़ा का सबसे ज्यादा फायदा भारतीय आईटी पेशेवरों को मिलता है। ट्रंप प्रशासन द्वारा शुल्क में इस अभूतपूर्व बढ़ोतरी के प्रस्ताव से भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और टेक कंपनियों पर बहुत बड़ा वित्तीय बोझ पड़ने वाला था। कानूनी जानकारों का मानना है कि अदालत का यह रुख यह साफ करता है कि कुशल प्रवासियों को रोकने के लिए प्रशासनिक शक्तियों का मनमाना इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
व्यापारिक संगठनों ने किया फैसले का स्वागत
अमेरिकी व्यापारिक संगठनों और अप्रवासी अधिकार समूहों ने बोस्टन संघीय अदालत के इस फैसले का पुरजोर स्वागत किया है। उनका कहना है कि इस फैसले से वैश्विक स्तर पर अमेरिका की छवि एक खुली और प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था के रूप में बनी रहेगी। दूसरी ओर, विशेषज्ञों के अनुसार यह अदालती आदेश ट्रंप प्रशासन की सख्त अप्रवासी नीतियों (Immigration Policies) के खिलाफ एक बड़ी कानूनी जीत है।
