लखनऊ: उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों (मास्टर साहब और मैडम जी) के लिए योगी सरकार ने खुशियों का पिटारा खोल दिया है। बेसिक शिक्षा परिषद ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए अंतरजनपदीय स्थानांतरण (एक जिले से दूसरे जिले में तबादला) की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है। इस बार की नई ट्रांसफर पॉलिसी में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिससे गंभीर बीमारी, दिव्यांगता और पारिवारिक वजहों से परेशान शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी।
परिषद ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को तय समयसीमा के भीतर आवेदनों को आगे बढ़ाने के कड़े निर्देश दिए हैं। आइए जानते हैं शिक्षकों को मिलने वाली इन 6 बड़ी सौगातों के बारे में:
ये दी हैं छह बड़ी सौगातें
न्यूनतम सेवा की बाध्यता खत्म: इस बार ट्रांसफर के लिए नौकरी के न्यूनतम सालों (सेवा अवधि) की शर्त को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब कोई भी पात्र शिक्षक सालों का इंतजार किए बिना सीधे तबादले के लिए आवेदन कर सकता है।
दिव्यांग शिक्षकों को पहली प्राथमिकता: यदि कोई शिक्षक/शिक्षिका, उनके पति-पत्नी या अविवाहित बच्चे 40 फीसदी या उससे अधिक दिव्यांगता से जूझ रहे हैं, तो वे आवेदन के पात्र होंगे। इसके लिए सक्षम अधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र देना होगा।
गंभीर बीमारी से पीड़ित परिवारों को मौका: कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी या डायलिसिस पर निर्भर शिक्षक, उनके जीवनसाथी या अविवाहित बच्चों को नीति के तहत पात्रता दी गई है। सरकारी अस्पताल के मेडिकल सर्टिफिकेट या बड़े प्राइवेट अस्पताल के इलाज का सत्यापन कराकर राहत मिल सकेगी।
पति-पत्नी को साथ रहने का अवसर: अलग-अलग जिलों में कार्यरत शिक्षक दंपत्ति (कपल्स) को अब एक ही जिले में ट्रांसफर का मौका मिल सकेगा। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय जिले के शिक्षक-छात्र अनुपात (Teacher-Pupil Ratio) के आधार पर होगा।
आसान और पारदर्शी आवेदन प्रक्रिया: पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक निर्धारित प्रारूप (फॉर्मेट) तैयार किया गया है। सभी आवेदन संबंधित जिले के BSA के माध्यम से ही तय समयसीमा के भीतर आगे भेजे जाएंगे।
प्रमोशन पाने वाले शिक्षकों को भी लाभ: हाल ही में पदोन्नत हुए शिक्षक भी आवेदन कर सकते हैं। शर्त यह होगी कि उन्हें उसी जिले के लिए अप्लाई करना होगा, जहाँ उनकी मूल नियुक्ति तिथि के आधार पर प्रमोशन की पात्रता बनती हो।
योगी सरकार के इस संवेदनशील फैसले से न सिर्फ शिक्षकों का मानसिक तनाव दूर होगा, बल्कि वे अपने पारिवारिक दायित्वों को निभाते हुए शिक्षण कार्य को और बेहतर ढंग से कर सकेंगे।
