यूपी के ‘ग्राम प्रधानों’ की खुल गई किस्मत! सरकार ने शुरू की कार्यकाल बढ़ाने की बड़ी तैयारी, जानें क्या है नया प्लान

मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों का इंतजार कर रहे लोगों और वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों के लिए एक बहुत ही बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य में पंचायत चुनावों में हो रही देरी के बीच योगी सरकार ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों को बड़ी राहत देने जा रही है। सरकार अब एक विशेष प्रशासक समिति (एडमिनिस्ट्रेटर कमेटी) के माध्यम से इन सभी पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल आगे बढ़ाने की तैयारी में जुट गई है।

उत्तर प्रदेश में समय पर पंचायत चुनाव न हो पाने की स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए इस कदम को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में शासन को एक बकायदा प्रस्ताव भी भेज दिया है। इस प्रस्ताव में साफ कहा गया है कि वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों यूपी में टलेंगे पंचायत चुनाव? योगी सरकार वर्तमान प्रधानों को ही सौंप सकती है कमान।

किया जा सकता है प्रशासक समिति का गठन
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तारीखों का इंतजार कर रहे लोगों और मौजूदा जनप्रतिनिधियों के लिए एक बड़ी खबर आई है। सूबे में समय पर पंचायत चुनाव न हो पाने की स्थिति को देखते हुए योगी सरकार ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल आगे बढ़ाने की एक विशेष तैयारी में जुट गई है। शासन स्तर पर चल रही इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को बिना किसी रुकावट के जारी रखने और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए एक ‘प्रशासक समिति’ (एडमिनिस्ट्रेटर कमेटी) का गठन किया जा सकता है।

क्या है सरकार का नया प्लान?
प्रतिनिधियों को मिलेगी कमान: पंचायती राज विभाग द्वारा शासन को भेजे गए प्रस्ताव के मुताबिक, वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों को ही इस प्रशासक समिति का मुखिया बनाने की सिफारिश की गई है।

कार्यकाल में विस्तार: यदि इस प्रस्ताव को कैबिनेट की अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो आगामी 26 मई को कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी ग्राम प्रधान और अन्य पंचायत प्रतिनिधि अपने पदों पर बने रहेंगे।

विकास कार्य नहीं होंगे प्रभावित: इस कदम का मुख्य उद्देश्य चुनावों में हो रही देरी के बावजूद गांवों में चल रही सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की रफ्तार को बनाए रखना है।

बड़ी राहत: अगर कैबिनेट इस प्रस्ताव पर मुहर लगा देती है, तो वर्तमान त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों को बिना चुनाव के ही कुछ और समय के लिए काम करने का मौका मिल जाएगा, जो उनके लिए किसी बड़ी लॉटरी से कम नहीं है।को ही प्रशासक समिति का मुखिया बनाकर उन्हें आगे की जिम्मेदारी सौंप दी जाए। अगर इस प्रस्ताव पर कैबिनेट की अंतिम मुहर लग जाती है, तो आगामी 26 मई के बाद भी सूबे के ग्राम प्रधान और अन्य पंचायत प्रतिनिधि अपने पदों पर बने रहेंगे और अपनी भूमिका निभाते रहेंगे।

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